चार दिन की जिन्दगी
        हंसी खुशी से काट ले
ना किसी का दिल दुखा
        दर्द सबके बांट लें
कुछ नहीं साथ जाना
        सिर्फ नेकी के सिवा
कर भला होगा भला
        बात यह मेरी मान ले
हाथ खाली ले कर आया
        और खाली हाथ ही जाना है
क्यों करता यहां तेरी मेरी
        इक दिन होनी यहां सबकी
निश्चय ख़त्म कहानी है
रैव्ह राजेश गिरधर
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