आग में ताया हुआ सोना ही कुन्दन बनता है ‘तुम्हारा परखा हुआ विश्वास, जो आग से ताए हुए नाशमान सोने से भी कहीं अधिक बहुमूल्य है, यीशु मसीह के प्रगट होने पर प्रशंसा और महिमा और आदर का कारण ठहरे।’ सोने को सात बार शुद्ध किया जाता है। हम साबुन और पानी से उसे शुद्ध नहीं कर सकते। सोनार सोने को एक कटोरी में रखता है और उसे पिघलाता है। जब वह पूरी तरह से पिघल जाता है तब फूँकनी द्वारा उसे फूँकता है। ऐसा करने के द्वारा उसमें से आसमानी रंग की ज्वाला प्रगट होने लगती है जिससे कि रेत के छोटे से छोटा कण भी भस्म हो जायें। आईने में जैसे हम चेहरे को देख सकते हैं वैसे, पिघले हुये सोने में जब तक सुनार को अपना चेहरा दिखाई न दे तब तक सोनार उसे शुद्ध करता ही रहता है। रेत का एक छोटा कण भी सोने को धुँघला कर सकता है। इसलिये वह आसमानी रंग की ज्वाला को फूँकता ही रहता है। इसी रीति से प्रभु कहता है, यदि हम ऐसा शुद्ध विश्वास चाहते हों तो हमें भी अनेक शुद्ध करने वाली आग में से होकर गुजरना पड़ेगा। इन अंतिम दिनों में हमें मजबूत विश्वास की जरुरत है। इन दिनों में अनेक ऐसे लोग हैं जो हमारे हृदय में भी शंका उत्पन्न करना चाहते हैं। कितने ही लोग चिन्ह और चमत्कार की खोज में लगे है और कितने ऐसे हैं, जो स्वप्नों को पूरा होने की आशा रखते हैं। दुःखरुपी शुद्ध करने वाली आग में से गुजरने के द्वारा सरल, दृढ़ और कार्यशील विश्वास प्राप्त होता हैं। जब प्रभु कहता है कि, तू मुझसे सोना मोल ले, तब इसका अर्थ यह है कि हम में उसका पूर्ण विश्वास हो। तभी तों ये लोग हमारे मनों में शंका के बीज बोने में सफल नहीं होंगे।
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर

