सभोपदेशक 4=12 के अनुसार :- जो डोर तीन तागे से बटी हो , वह जल्दी नहीं टूटती| आज कल समझौता करने से, अलग होना ज्यादा बेहतर समझा जाता है| समझौते से मेरा मतलब , रिश्तों को बेवज़ह ढोना नहीं है| दूसरे को बदलने से पहले , ख़ुद में बदलाव ज़रूरी  है| विवाद किस परिवार में नहीं हैं , मगर झगड़ने से बेहतर है , मिल कर समस्या का समाधान तलाशना| अहम् का टकराव , दूरियों की सबसे बड़ी वज़ह है| इज्ज़त चाहिए , तो दूसरे की इज्ज़त करना निहायत ज़रूरी है| अलग हों जाने को समस्या का समाधान नहीं माना जा सकता| माँ बाप के अलगाव का गहरा असर , बच्चों की मानसिकता पर पड़ता है| जिस परिवार में पति पत्नी लगातार झगड़ते रहते हैं , बच्चे उसी मानसिकता के साथ बड़े होते हैं| ऐसे भी लोग हैं जो कहते हैं अगर यही वैवाहिक जीवन है , तो इससे दूर रहना ही बेहतर है| कुछ अगर साथ रह भी रहे हैं , तौभी दूरी कायम रखते हैं| मानसिक दूरियां , आपके आत्मिक जीवन को प्रभावित करती हैं| दौलत कमाने से , ख़ुशियाँ नहीं खरीदीं जा सकतीं| परिवार के तनाव को , बच्चे समझते हैं| आप आपस की दूरियों को , बच्चों से छिपा नहीं सकते| बदलाव दोनों ओर से जरूरी है| समझौता , मुहब्बत नहीं है| कमियां हर इंसान में होती हैं , और ख़ूबियाँ भी होती हैं| ये आप पर निर्भर है , आप किसे देखते , और किसे नज़रंदाज़ करते हैं| गिले-शिकवे रखने से बेहतर है , उन्हें मिटा देना| 
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर
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