हम ख़ुदा से रोज़ की रोटी मांगते है , जब मिल जाती है तो हम ख़ुश हो जाते हैं| उससे भी ज्यादा ख़ुशी ख़ुदा को मिलती है|  वो हमें रोटी खिलाता है , इसलिए की वो बांटने की ख़ुशी को जानता है| ख़ुदा हमें खाना सिर्फ़ खाने के लिए नहीं , वो हमें बांटने के लिए भी देता है| येशू तब तक रोटी और मछली बांटता रहा , जब तक की सबने पेट भर कर नहीं खाया| दूसरों को पेट भर कर खिलने की ख़ुशी , येशू के चहरे पर साफ़ दिखाई देती होगी| ज़रा शागिर्दों के बारे में सोचिये , हज़ारों लोगों को खाना बांटना , फिर बचे हुए रोटी के टुकड़ों को इकठ्ठा करना| वो काम बेहद थका देने वाला रहा होगा , मगर उसमें जो ख़ुशी हासिल हुई होगी , वो बेयान से परे है| बांट कर खाने में जो ख़ुशी है , वो अकेले खाने में नहीं है| ऐसे लोगों की दुआएं , ज़िन्दगी भर आपका पीछा करती हैं| सारपत की महिला ने , एक मुट्ठी मैदे में से , एलियाह को रोटी खिला कर , अपनी दरिया दिली का सबूत पेश किया| जब हम दूसरों को बांटते हैं , तो हमारा खाना कम नहीं होता ; बढ़ता ही जाता है| जिसका पेट भरता है , वो दिल से दुआ देता है| दिल से निकली दुआ , कभी बेअसर नहीं होती| 
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर
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