हमारा आत्मिक जीवन कुछ कमज़ोर और कुछ मज़बूत है| यदि आत्मा तैयार है, तो शरीर कमज़ोर है| *शैतान आक्रमण करने के लिए, हमारी कमज़ोरियों की तलाश में रहता है|*  परमेश्वर ने यर्मियाह से कहा—मैं तुझे लोहे का खंबा और पीतल की शहरपनाह बनाऊंगा| इसमें मिलावट के लिए कोई जगह नहीं थी| इस विषय को और गहराई से समझने के लिए मैं, यीशु का उदाहरण लेना चाहूंगा| 40 दिन निराहार रहने के बाद, यीशु को भूख लगी| ठीक उसी समय शैतान आया और पत्थर से रोटी बनाने की सलाह देने लगा| *भूख और रोटी का आपस में गहरा संबंध है|यीशु ने भूख को अपनी कमज़ोरी नहीं बनने दिया|* हम सब की अपनी, अपनी ज़रूरतें हैं| कभी-कभी ज़रूरत हमारी कमज़ोरी बन जाती है| *अगर मुझे धन की सख्त ज़रूरत है, तो इसका मतलब यह नहीं, कि मैं परमेश्वर के पैसे में हांथ लगाऊं ; या धन हासिल करने के लिए, ग़लत रास्ते पर चल पडूं|दाऊद बहुत शक्तिशाली था, परन्तु वासना उसकी कमज़ोरी साबित हुई|* इसमें दोष बेतशेबा की सुंदरता का नहीं था| शैतान ने वहीँ प्रहार किया, जो स्थान उसे कमज़ोर नज़र आया| *ग़लत ढंग से ज़रूरत पूरा करने से ; ज़रूरत का पूरा ना होना ज़्यादा अच्छा है| आज बलात्कार की सज़ा म्रत्यु दंड है ; फिर भी बलात्कार क्यों नहीं रुक रहे| इंसान अपनी शारीरिक अभिलाषा के सामने कमज़ोर साबित हो रहा है| मिट्टी से बनी दीवार चोर को अन्दर आने से नहीं रोक सकती|* 
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर
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