सब्त का दिन| सब्त के दिन , चर्च में आराधना होती है , और इस दिन हमें आराधना करना चाहिए| यशायाह 58:13 में इस दिन की महत्ता को विस्तार से समझाया गया है| यह केवल , आराधना का दिन ही नहीं है| *पहला — यदि तू विश्राम दिन को अपवित्र ना करे —इसका मूल अर्थ है , यदि तू विश्राम दिन से अपना पाँव ना मोड़े| जिस उद्देश्य के लिए विश्राम दिन बना है , उसकी विपरीत दिशा में ना जाये| दूसरा —विश्राम दिन में अपनी इच्छा पूरी ना करे –सब्त का दिन परमेश्वर की इच्छा पर चलने का दिन है| आपकी इच्छा परमेश्वर की इच्छा से टकराने ना पाए| तीसरा —सब्त के दिन को आनंद का दिन माने —किसी किसी के लिए , चर्च जाना , आनंद का कारण नहीं होता है| कुछ सिर्फ़ मुँह दिखाने के लिए , चर्च जाते हैं| चौथा —सब्त का सम्मान करके , अपने मार्ग पर ना चले —हमारा मार्ग सांसारिक है , तो हम परमेश्वर के मार्ग से भटक गए हैं| ये हमारा नहीं , परमेश्वर का दिन है| इसकी इज्ज़त करना हमारा परम कर्तव्य है| पांचवी –अपनी ही बात ना बोले —सब्त का दिन , परमेश्वर के वचन की चर्चा का दिन है| दिनभर उसके वचन की चर्चा होती रहे|*
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर

