आज के समय.मे जी तो सब ही रहे हैं, मगर सवाल यह है, उनके जीने का मक़सद क्या है?चंगाई सभा हो तो, हज़ारों, लाखों की भीड़ इकट्ठी हो जाती है| जहाँ सिर्फ़ वचन का प्रचार हो, वहाँ गिने, चुने लोग ही दिखाई देते हैं|चंगाई मिलने के बाद, अगर आत्मा ना बचे, तो उस चंगाई से क्या फ़ायदा? चंगा होने के बाद,अगर इंसान फ़िर से सांसारिक हो जाए; स्वस्थ होने के बाद, अगर वो शैतान के काम आये तो क्या फायदा । आपके जीने का मक़सद क्या है? क्या आप ख़ुदा के लिए जीना चाहते हैं? या आप इसलिए जी रहे हैं, कि ख़ुदा का नाम ऊंचा उठाया जाए? आपके जीने से ख़ुदा को महिमा मिले| या कहीं ऐंसा तो नही कि परमेश्वर की आशीषें, संसार और शैतान के काम तो नहीं आ रही हैं? जवाब, आपको ख़ुद को देना है ✔️*
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह. राजेश गिरधर ®

