बाइबल में जिक्र आता है हन्ना का, कहते हैं हन्ना के कोई औलाद नहीं थी , यही उसकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा दर्द था।हन्ना के आंसू , उसका दर्द बयां करने के लिए काफ़ी थे।दुनियां की भीड़ में आंसुओं की भाषा समझने वाले , कम ही होते हैं।जिसने आंसुओं को बनाया है , वो ही आंसुओं की भाषा सबसे बेहतर जनता है। आंसूओं की कोई भाषा नहीं होती , मगर फिर भी वो बहुत कुछ बोलते हैं।

 भजन संहिता-56=8 के अनुसार — तू मेरे मारे मारे फ़िरने का हिसाब रखता है , तू मेरे आंसुओं को अपनी कुप्पी में रख ले , क्या उनकी चर्चा तेरी पुस्तक में नहीं है? वो आपके आंसुओं को बेकार नहीं जाने देगा।यीशू आपका क़रीबी दोस्त है , वो आपसे प्यार करता है। बाइबल बताती है कि:-एक गुनहगार महिला अपना दर्द सीने में समेटे आंसुओं से यीशू के क़दमों को भिगो रही थी। सारा शहर जानता था की वो गुनहगार है मगर कोई उसका दर्द नहीं समझता था। उसके आंसू ही उसके जीवन की सारी कहानी बता रहे थे| यीशू ख़ामोशी की आवाज़ भी जानता है| यीशू से अपना दर्द बयां करने के लिए , आपके आंसू ही काफ़ी हैं। उसका वायदा है– यशायाह-25:8 के अनुसार= कि मैं तेरी आंखों से सब आंसु पोंछ दूंगा। उसके एक-एक वायदे हां और आमीन में पूरे होते हैं।
आमीन,एक बार फिर से कहें
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर
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