एक बहुत बड़ा सवाल आज हम सबके सामने खड़ा है ,कि क्या हम अपने परमेश्वर के साथ इमादारी बरतते हुए चलते हैं यह हमें अपने अन्तर्मन से पूछना होगा इसका जवाब सच्चाई से देखें तो तकरीबन न ही होगा ।
हम विश्वासी लोग जब भी मुसिबतों का सामना करते हैं , जब भी बीमारियों का सामना करते हैं , जब भी गरीबी का सामना करते हैं , जब भी लडाईयों का सामना करते हैं तब हमें अपना परमेश्वर बहुतायत से याद आता है ।
यह बात बिलकुल ही सही है तब तब हम प्रभु के दासो के पास जाकर प्रार्थना करवाते , लोगों को प्रार्थना Request भेजते पूरी हैं हम मुसिबत में है हमारे लिये प्रार्थना करो और हर मनन्त को मान लेते हैं यह बिलकुल ही सच्ची बात है ।
पर जब वो मुसिबतों का पहाड हमारे ऊपर से चला जाता है तब हम खुशियों में इतना खो जाते हैं कि हमें ध्यान ही नही रहता हमने प्रार्थना में परमेश्वर को क्या वादा किया था ; परमेश्वर के दास के पास जाकर पाप क्षमा की प्रार्थना करवाई तो क्या वादा परमेश्वर के दास के सामने परमेश्वर से किया था सब भूल जाते इस बात का डिंडोरा पीटते फिरते हैं हमारा परमेश्वर महान है हमारी प्रार्थना को सुनता है आनन्द मनाते हुए परमेश्वर से किये वादों को भूल जाते हैं क्या यह सही बात है ? 
 वचन कहता है तू जल्दी से कोई मनन्त न मानना कोई कसम न खाना क्योंकि परमेश्वर स्वर्ग में है तू पृथ्वी पर ? 
और हम इस बात को भूल जाते हैं जो कि आने वाले समय में नुकसान का कारण होती है । इसके लिये सब को प्रार्थना करके अपने को जाँचना होगा क्या हम सही है 
परमेश्वर सबको आशीष दे ।
आमीन
आपकी सेवा में प्रभु का दास
रैव्ह राजेश गिरधर
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