अकसर ऐसा बहुत से लोगों के साथ होता है सोचते कुछ हैं और करने की भरपूर कोशिश भी करते हैं पर वो होता नहीं जो उन्होंने करने की ठानी थी ?
यह एक ऐसी सच्चाई है जिसे हम स्वीकार करते हैं । हमारे काम करने के तरीके भी सही होते हैं , और हम मन लगाकर उसे करते भी है ; पर फिर भी सफलता हाथ नही लगती ? हम जो काम करते हैं जिस ओर जाना चाहते हैं उस ओर न जाकर दूसरी ओर चल देते हैं ? जो काम नही करना चाहते वो ही काम हमसे हो जाता है ? बहुत बार ऐसा होता है।
हम अपने लिये बडी बडी योजनाओं को बनाते हैं पर उन योजनाओं को पूरा नही कर पाते ; दूसरी ओर हमारी योजना चली जाती है , यह हमारे वश में नही क्योंकि सभोपदेशक की पुस्तक कहती है हर बात का समय निश्चित है । मरने का समय , जीने का समय , मकान बनाने का समय , बने हुए को तोडने का समय गले लगाने का समय गले से हटाने का समय सब परमेश्वर ने निश्चित करके रखा है ।
हम अपने मार्ग को निर्धारित नहीं कर पाते , हम परमेश्वर के कहे अनुसार चलते तो हैं मगर बहुत देर के बाद ; जब काफी समय व्यतीत हो चुका होता है , अपनी गलतियों के कारण । हमारा मार्ग हमारे वश में नही है जो परमेश्वर ने हमारे लिये करना है होगा वही यही नियती है जिसे हमें समझना होगा । अपने को परमेश्वर की योजनाओं में शामिल करना होगा तो ही हम सही रास्ते पर चल सकते हैं ।
आमीन
प्रभु सबको आशीष दे ।

