मनुष्य के मन म़े बहुत सी कल्पनाएँ होती है परन्तु जो युक्ति यहोवा करता है , वही स्थिर रहती है ।
यह बात पूरी तरह से सही है इस बात से हम इन्कार नहीं कर सकते ।
हम अपने लिये , अपने बच्चों के लिये , अपने परिवार के लिये न जाने क्या- क्या सोचते हैं ? हम यह करेंगे , हम वह काम करेंगे , हम यहाँ जाएँगे , हम वहाँ जाकर व्यापार करेंगें इस काम को इस तरह करेंगें उस काम को इस तरह करेंगे और न जाने कितनी ही कल्पनाएँ और योजनाएँ हम इस छोटे से जीवन मे बना लेते ; पर नहीं जानते कल क्या होनेवाला है
कल का सूरज हमें देखना नसीब भी होगा कि नहीं ? हम कल जिन्दा भी रहेंगे या नहीं ? यह बात हमारे दिमाग में बिलकुल भी नहीं आती । बस योजनाओं पर योजनाएँ कल्पनाओं पर कल्पनाएँ करते और सोचते रहते हैं , मगर परमेश्वर ने हमारे जीवन में कोई और ही कल्पना कर के रखी होती है । हर किसी के लिये परमेश्वर की योजना अलग होती है ; कोई किसी से मेल नहीं खाता , पर परमेश्वर की योजना हम सबके लिये अलग होती है, क्योंकि हमारा जीवन जो हमें परमेश्वर ने दिया है ; वो उसकी योजना का एक हिस्सा है ।
उसने अपनी योजना के अनुसार हमे पृथ्वी पर भेजा , अपने अनुसार काम करवाने को , यही कारण वो हमारी योजनाओं को धराशाई करके अपनी योजना को पूरा करता है । जिसे हम जितनी जल्दी समझ जाएँ , यह हमारे लिये उतना ही बैहतर होता है । अगर आप भी अपनी कल्पनाओं में योजनाओं मे फसे हो तो उनसे बाहर आकर परमेश्वर से रास्ता माँगों ? वो अपनी योजना के अनुसार सही रास्ता आपको जरूर दिखाएगा ।
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे

