यीशु का जन्म , अपने आप में एक अद्भुत घटना है| जब तक हम इसके महत्त्व को गहराई से ना समझ लें , ख्रीस्त के जन्म उत्सव को मनाना अधूरा ही नहीं , व्यर्थ भी है| पाप के कारण , इंसान और परमेश्वर के बीच की दूरियां बढ़ते जा रहीं थीं| जिसे पाटना मनुष्य के बस की बात नहीं थी| बाग़ ए अदन से जुदाई का सिलसिला शुरू हुआ था| यीशु इस लिए मनुष्य बना , कि परमेश्वर और मनुष्य को फ़िर से एक कर दे| परमेश्वर मुहब्बत है , मगर इस मुहब्बत को समझना , इंसान के सोच के परे था| यीशु इसलिए इंसान बना ,कि उसकी मुहब्बत को साकार कर दे| परमेश्वर की मुहब्बत की गहराई और ऊंचाई को , हम यीशु में ही समझ पाते हैं|यीशु इंसान इसलिए बना , कि हमको परमेश्वर की संतान बना दे| यीशु में ही हमें , परमेश्वर की संतान होने का अधिकार मिलता है|परमेश्वर की संतान होने से बढ़कर , कोई और आशीष हो ही नहीं सकती| क्योंकि संतान को ही घर में रहने का अधिकार है| यदि हम संतान हैं , तो वारिस भी हैं , वरन मसीह के संगी वारिस है| यीशु इसलिए जन्मा कि हमको , स्वर्ग का वारिस बना दे|
आमीन
प्रभु की स्तूती हो (PRAISE THE LORD)
रैव्ह राजेश गिरधर
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