सभोपदेशक 1:9 —जो कुछ हुआ , वह फ़िर होगा ; और जो कुछ बन चुका है , वह फ़िर बनेगा , सूर्य के नीचे कुछ भी नया नहीं है|* समय अपने साथ ,ना कुछ लेकर आता है , और ना कुछ देकर जाता है| *क्या सन बदल जाने से लोगों की सोच बदल जाती है? क्या नया साल , आपकी आत्मा को नया बना सकता है?क्या नए साल में , रिश्तों में कुछ नयापन होगा?* हम फ़िर उसी चक्र में वापस लौट आयेंगे| फ़िर वोही भाग ,दौड़ ; फ़िर वोही चिंताएं , वोही निराशा और हताशा| क्या आपने इस वर्ष में कुछ नया करने की सोची है| *जो गलतियां आपने , गुज़रे साल में की हैं ; क्या उनको फ़िर दोहराएंगे? अगर आप ,पिछले साल पराजित हुए हैं , तो क्या नए साल में , जीतने का सिलसिला शुरू करेंगे? क्या नए साल में , टूटे हुए रिश्तों को नया रूप देंगे? आपका जीवन , पुराने ढ़र्रे पर नहीं चलेगा , लेकिन स्वभाव में एक नयापन , नज़र आएगा| *क्या इस साल में आप , नया बल प्राप्त करते जायेंगे? क्या आप उकाब के समान , ऊंचाईयों पर उड़ने की सोच रहे हैं? पिछले साल , आप आत्मा की जिस ऊंचाई पर थे ; इस साल और ऊंचा उड़ने का संकल्प किया है| क्या आपने परमेश्वर के साथ , अपने संबंधों को एक नया रूप देने के बारे में सोचा है? ज़िन्दगी में कुछ नया ना हो , तो नया साल कैसा? चलो परमेश्वर से नए रिश्ते बनाएं ; चलो नई ऊंचाईयों पर उड़ें|
आमीन फिर से बोलें आमीन
प्रभु आपकी नई सोचों पे आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर

