आज का वचन हमारे आत्मिक जीवन की बढ़ोतरी के लिए बहुत बड़ी सीख है जो परमेश्वर हमें सिखाना चाहता है कि ज्यादातर हम अपने जीवन के सफर में चलते हुए दूसरों की गलतियों को बैहद फुर्ती से पकड कर उसे पापी , अज्ञानी , मूर्ख ,और न जाने क्या – क्या कह देते व उसकी छवि वही अपने दिमाग में फिट करते हुए उसे माफ नही कर पाते ? 

मगर वही सब कोई हमारे बारे कहता तो हमें बुरा लगता है और एक कडवाहट लिये दिन बिताने लगते हैं और मोंके की तलाश में भी लगे रहते हैं किस प्रकार उसका बदला दुगना करके दूँ ? 
बस इसी उधेडबुन में हम परमेश्वर के व दूसरे के दोषी भी ठहर जाते हैं, हम तो चाहते हैं लोग हमें माफ करें पर हम खुद दूसरों को माफ नहीं करना चाहते वजह अहंकार, जो हमारे अन्दर इस कदर भरा रहता है कि कुछ न होते हुए भी उसे सारी उम्र अपने ऊपर लादे – लादे फिरते हैं फिर सोचते हैं हमारा फायदा जो होना चाहिए वो क्यों नहीं हो रहा तब हम उन कमियों को ढूँढने में समय बिताते हैं ? हम प्रभु से अपना पाप , अपराध, गुनाह, गलतियां माफ करवाने के लिये ऐडी चौटी एक कर देते और दूसरे का गला दबाकर भी उसको छोड़ना नहीं चाहते,,जैसा आप मती 18 :-21 से 34 तक पढ सकते हैं पूरा दृष्टान्त आपके सामने आ जाएगा
आज हमें जरूरत है खुद को बदलने की न कि दूसरे को जब हम बदल जाएँगे तो सब अपने आप बदलते नजर आ जाएँगे बस शुरुआत करो प्रभु साथ देगा ।
आमीन, फिर से कहें
आमीन
आपकी सेवा में प्रभु का दास
रैव्ह राजेश गिरधर
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