परमेश्वर हमको जो अवसर (समय) देता है उसका उपयोग परमेश्वर की महिमा के लिए करना चाहिए, क्योंकि हमको जो जो दिया गया है उसका हमें हिसाब देना पड़ेगा।
           मान लो कि आप रेलगाड़ी में सफर कर रहे हैं और आपकी गाड़ी किसी जगह पर पाँच से छः घंटो तक रूकी हुई हैं। तो यह समय आप किस रीति से खर्च करेंगे? अधिकांश लोग चुटकुले बोलकर – सुनकर, हँसी-मजाक में या मूंगफली के दाने खाने में अपना समय बिताएँगे। कितने ही लोगों को पूरे समय मुँह में कुछ न कुछ डालने की आदत होती है। सफर के वक्त मुँह में डालने के लिए कुछ न मिले तो बेचैन हो जाते हैं। विश्वासी होने के नाते हमारा समय फायदे मदं रीति से बीताना चाहिये। प्रभु हमको कभी कभी ज्यादा वक्त किसी खास उद्देश से देता है। हो सकता है यह समय प्रार्थना, वचन का मनन या आत्मा जीतने के लिये दिया हो। ऐसे समय में प्रार्थना करनी चाहिये, ‘प्रभु, इस समय का श्रेष्ठ उपयोग करने के लिए मेरी सहायता करें।’ यदि आपके पाचं सौ रुपए खो गये हों तो आप पूरा मैदान छान मारते हैं, आप खरीददारी के लिये बाजार जाते हैं और अनेक दुकानें फिरकर आने के बाद सौ रुपए बचाते हैं तो उसमें बहुत गर्व करते हैं। रुपए के लिये इतना सोच विचार करते हैं तो परमेश्वर के समय के विषय में क्या? आप कितना समय गँवाते हैं? परमेश्वर के वचन के अनुसार जो अनुग्रह कारी समय आपको मिलता है उसका उपयोग परमेश्वर की महिमा के लिए करना चाहिये जिससे कि आप सच्चाई से ऐसा कह सकें कि आपने ‘अवसर को बहुमुल्य समझा है।
जरा इस बारे में विचार कीजिए। 
आमीन
प्रभु आपको आशीष दे
रैव्ह राजेश गिरधर
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